1 पैसे लेकर धरना प्रदर्शन का लग रहा आरोप

2 चुनावी साल में कांग्रेस पार्टी की हो रही छबि धूमिल

 3 संचालिका दिव्या गौतम पर खबर छापने वाले पत्रकारों को मिल रही धमकियां.

जगदलपुर-भारतीय राष्ट्रीय सद्भावना कांग्रेस संघटन का धरना केवल दिखावा  साबित हो रहा है पहले दिन 11 बजे से 2 बजे तक कार्यकर्ताओं ने धरना दिया पर दूसरे दिन एक भी कार्यकर्ता धरना देने नही पहुचा लिहाजा कुर्सियां खाली रही- हमारे संवाददाता ने आस पास ठेला लगागर व्यापार करने वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे टेंट वाले टेंट लगाकर कुर्सियां लगा कर चला गया मगर कोई भी सुबह से नही पहुचा। पिछले 4 दिनों से शहर में सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय सद्भावना कांग्रेस संघटन ने जगदलपुर रेंजर सोनवानी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुये तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया था-और संघटन के कुछ पदाधिकारी संजीव शर्मा के नेतृत्व में धरना पर्दशन में कल 1 अगस्त को बैठे भी- हाता  मैदान के सामने नायापारा जाने वाले रास्ते मे टेंट लगाया गया और वहां कांग्रेस के स्थानीय बड़े बड़े पहुँचे भी मगर जैसे ही पदाधिकारियों को अहसास हुआ कि अरे यह तो आदिवासियों के खिलाफ ही हम जा रहे है  तो कांग्रेस के बड़े नेता धीरे धीरे खिसकने लगे-इससे अंदाज लागया जा सकता है कि कांग्रेस की नैया कांग्रेस के लोग ही डुबोनो के चक्कर मे है – सूत्र बताते है कि कांगेर घाटी राट्रीय उद्यान की संचालिका दिव्या गौतम और कोटमसर रेंजर अशोक सोनवानी के बीच वर्च्चव की लड़ाई चल रही है इसी बीच दिव्या गौतम ने विभाग में पदस्त चौकीदार सीताराम को अपने सरकारी बंगले में बुला कर अपने पति से पिटवा दी जिसे लेकर काफी हंगामा हुआ देखते ही देखते मामला उच्च अधिकारियों तक पहुँची-इस बीच दिव्या गौतम के हितैषी साथियों ने मामले में राजनीति घुसाने की योजना बनाई और फंडिंग करते हुये भारतीय राष्ट्रीय सद्भावना कांग्रेस संघटन को मैदान में उतार दिया,संघटन के उच्च पदाधिकारी भी उनके झांसे में आ गये धरने में बैठ गये-सूत्र बताते है कि पीसीसी चीफ इस धरने को लेकर नाराज हो गये क्योंकि यह धरना व्यक्तिविशेष के लिये दिया गया था ना कि आम नागरिकों के हित मे लिहाजा उन्होंने बस्तर कांग्रेस को ये निर्देशत किया कि तत्काल प्रदर्शन को बंद कराये या उस धरने में ना जाय-पीसीसी चीफ के फटकार के बाद तीन दिन तक चलने वाला धरना प्रदर्शन दम तोड़ने लगी है। अब आयोजनकर्ताओं को इस बात की चिंता हो रही है कि तीन दिन के टेंट का किराया कौन देगा क्योंकि संचालिका दिव्या गौतम को तो हटा दिया गया है – मगर इस बात की भी चर्चा है कि मामले को राजनीतिक रूप देने के लिये लंबी डील हुई है जो दो पत्रकारों ने करवाई है जिसमे उनका हिस्सा अलग से है।

पत्रकारों को मिल रही धमकियां

आदिवासियों और बस्तरिया पर हो रही अत्याचार के खिलाफ लगातार स्थानीय मीडिया संचालिका का खिलाफ खबरे प्रकशित कर रही है। जिसे लेकर धमकियां भी मिल रही है पर्शनल मोबाइल नम्बर के व्हाट्सएप पर तरह तरह के मैसेज डाले जा रहे है तो फोन कर घर के अन्य सदस्यों के खिलाफ मोर्चा खोलने तथा झूठे समाचार बनाने की धमकियां दी जा रही है और तो और कब कहा और किस लिये विभागीय कार्यालय जा रहे है उसकी भी निगरानी की जा रही है-जिले के बड़े बड़े अधिकारियों को पत्र लिख कर साथ ना देने की शिफारिशें की जा रही है-दरअसल 3 जुलाई को कुछ लोगों को दिव्या गौतम के पति पन्नालाल अहिरवार द्वारा तोकापाल बुलाकर पार्टी देकर मैनेज किया गया था उस दिन से आज तक वे लोग नमक का कर्ज अदा कर रहे है तो कई मामले को राजनीतिक रंग देने को कोई कोर कसर नही छोड़ रहा है।

19ff8342-3586-423e-b8e8-4e82eb9d1ab4
pg
2

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here