जालंधर। पंजाब की सियासत को गरमाने वाली पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की इतिहास की पुस्तक आखिर सिलेबस से इसी सत्र से हटा ली जायेगी। इस पुस्तक को लेकर पनपे विवाद के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने जाने मानें इतिहासकार प्रोफेसर किरपाल सिंह के नेतृत्व में 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था।

जांच कमेटी ने अपनी जांच में पाया है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी 12वीं की इतिहास की नई पुस्तक में तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। इसलिए कमेटी ने विवादित पुस्तक को वापस लेने की सिफारिश की है। कमेटी ने पुरानी पुस्तक को ही इस चालू शैक्षिक सत्र के लिए लगाने के लिए कहा है। कमेटी के अध्यक्ष इतिहासकार प्रोफेसर किरपाल सिंह ने बताया कि पुस्तक सही नहीं है। इसमें इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। जांच कमेटी की मीटिंग इसी महीने होगी, जिसमें और गहराई से तथ्यों की जांच-पड़ताल की जाएगी। इस के बाद जांच समिति मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।

इसी तरह प्रोफेसर किरपाल सिंह ने कहा कि नई किताब बनाने वाली समिति ने इतिहास के तथ्यों को अनदेखा करने का काम किया, जो सही नहीं है। जांच कमेटी के अनुसार 280 पन्नों की पुस्तक में पंजाब के इतिहास के बारे में सिर्फ 22 पन्ने ही शामिल किए गए हैं। नई पुस्तक में महान नायक बाबा बंदा सिंह बहादुर पर सिर्फ पंक्तियां ही दर्ज हैं और पुरानी पुस्तक में 27 विषय थे। अब सिर्फ 16 हैं। पुस्तक तैयार करने वाले लेखक को इतिहास का अच्छा जानकार होना चाहिए। आंखें बंद कर किताब में से इतिहास को काट देना बुद्धिमत्ता नहीं है।

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