बीजापुर/जगदलपुर . बीजापुर जिले के बोड़गा में मारे गए सभी नक्सलियों की पहचान कर ली गई हैं। पुलिस ने इनकी पहचान के लिए आसपास के गांवों के लोगों को बुलाया था। इसके बाद पहचान पूरी होने पर मारे गए सभी लोगों के शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। 

इधर इस मामले में एक गंभीर बात यह कि पुलिस घटना के चार दिनों बाद भी मारे गए नक्सलियों के सिर्फ नाम, उम्र और उनके गांव का ही पता ढूंढ पाई हैं। विभाग के आला अधिकारी यह नहीं बता पा रहे है कि जिन्हें एनकाउंटर में मारा गया है कि वो नक्सली संगठन में कब से सक्रिय थे, संगठन में किस स्तर पर काम कर रहे थे, इन पर कोई इनाम था या नहीं और किस पद पर काम कर रहे थे। मारे गए लोगों की पहचान कार्रवाई से लेकर उनके शव परिजनों को सौंपने तक की पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया था और इस मामले में पुलिस ने किसी भी मृतक के परिजन को मीडिया के सामने पेश नहीं किया है। शनिवार को पुलिस की ओर से एक प्रेस नोट जारी कर मारे गए नक्सलियों के पहचान होने की जानकारी दे दी गई।

 इधर अभी भी बड़ा सवाल यह खड़ा है कि जो नक्सली मारे गए है वो किस स्तर के नक्सली है। पुलिस सूत्रों की मानें तो विभाग के आला अफसर भी मान रहे है जो लोग इस एनकाउंटर में मारे गए है वो एक दम से नए लड़के हैं। 
यहीं कारण है कि पुलिस के लिए काम करने वाले आत्मसमर्पित नक्सली भी इनकी पहचान नहीं कर पा रहे है। 

इसके अलावा एक आंशका यह भी व्यक्त कि जा रही है कि मारे गए सभी लोग या तो संघम सदस्य या फिर वे नक्सलियों के कैंप तक सामान छोड़ने या हाल ही में संगठन से जुड़ने की वजह से अपनी पहली ही ट्रेनिंग के लिए मौके पर जमा हुए थे लेकिन अफसर इस दिशा में भी कुछ नहीं कह पा रहे है।

सभी लोग कोर एरिया के, रैंक का पता नहीं : इधर मामले पर चर्चा करते हुए एसपी मोहित गर्ग ने बताया कि एनकाउंटर में मारे गए नक्सलियों के कैडर की शिनाख्त करने में दिक्कतें हो रही है। उन्होंने बताया कि जो लोग इसमें मारे गए हैं, वो कोर एरिया के रहने वाले हैं। ऐसे में इनके संबंध में आत्मसमर्पित लड़कों को भी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मारे नक्सलियों के परिजन जब शव लेने आए तो वे सिर्फ नाम और पते ही बता पाए। परिजनों ने यह बताया कि उनका लड़का या लड़की कब से नक्सलियों के साथ जुड़े थे। 

सुकमा में नक्सलियों ने किया विकास का दावा और फेंके पर्चे : ग्राम पंचायत दोरनापाल इलाके में नक्सलियों ने शनिवार को पर्चे फेंकने के साथ ही सड़क किनारे पेड़ों पर इसे लगाया है। इन पर्चों में नक्सलियों ने 10 फरवरी को ग्रामीणों से भूमकाल दिवस मनाने कहा है। इसके अलावा उन्होंने इन पर्चों में उनके द्वारा दक्षिण बस्तर इलाके के गांवों में विकास करने का दावा किया गया है। पर्चों में नक्सलियों ने ग्रामीण इलाकों में किए गए विकास कार्यों पूरा ब्यौरा दिया है। साथ ही पर्चे में नक्सलियों ने गोदेलगुड़ा मुठभेड़ को फर्जी कार्रवाई करार दिया है।

दोरनापाल के जगरगुंडा मार्ग पर गोरगुंडा गांव के पास नक्सलियों के दक्षिण बस्तर डिवीजन ने ये पर्चे लगाए हैं।  एएसपी शलभ सिन्हा का कहना है कि नक्सली जो विकास की बात कर रहे हैं, ये सरासर झूठा है। खुद नक्सली ग्रामीणों की हत्या मुखबिर के नाम पर कर रहे हैं। इन्हीं नक्सलियों के कारण इन इलाकों के ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हो रहे है।  

नाम-पता पूछकर परिजन को सौंपे शव : इधर पुलिस ने मृतकों के परिजनों के हवाले से सभी नाम और उम्र सार्वजनिक किए हैं। दस लोगों में से 6 उतला के रहने वाले हैं। मारे गए लोगों के नाम पते और उम्र इस प्रकार हैं

  • विजा माड़वी, उम्र 20 साल, उतला, भैरमगढ़ 

  • सोमारी फरसा, उम्र 19 साल, भैरमगढ़ 

  • शांति, उम्र 21 साल, कोलनार, भैरमगढ़ 

  • सुदरी ओयाम, उम्र 20 साल, तोड़पोट, भैरमगढ़ 

  • सुक्कू फरसा, उम्र 27 साल, उतला, भैरमगढ़ 

  • शंकर कड़ियम, उम्र 26 साल, उतला, भैरमगढ़ 

  • रामे ओयामी, उम्र 21 

  • साल, ताड़बाला, भैरमगढ़ 

  • राजू ओयामी, उम्र 26 साल, उतला, भैरमगढ़ 

  • सुक्कू बारसा, उम्र 25 साल, उतला, भैरमगढ़ 

  • परमेश बारसे, उम्र 25 साल, उतला, भैँरमगढ़

source by DB

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