ब्रिटिश राज्य ने भारत पर राज करके न सिर्फ अपनी हुकूमत चलाई बल्कि हमारी संस्कृति के साथ छेड़ छाड़ भी कि. यह बात सही है कि अंग्रेजों ने भारत में विकास के कई कार्य किए लेकिन वे कार्य तत्कालीन समय में ब्रिटिश राज की जरूरत थी. हम जितना मॉडर्निटी की तरफ बढ़ते जा रहे हैं उतनी ही तेजी से अपने कल्चर और सभ्यता से दूर होते जा रहे हैं. सुबह उठने के साथ ही हम खाने से लेकर सोने तक की सारी दैनिक कार्य अंग्रेजों की कॉपी करते हैं. इन सबके के बीच राहत देने वाली खबर यह है कि दुनिया धीरे-धीरे अब भारत और उसे जुड़ी चीजों को खुलकर अपना रही है.

खाना इंसान के जीवन में एक अहम भूमिका निभाता है. अगर खाना खाने के लिए कहा जाए तो सबसे पहले आपके जहन में क्या आता है? जाहिर सी बात है खाना खाने के नाम पर हम सभी के मन में सब्जी, रोटी, चावल और भी अन्य पकवान से भरी थाली की छवि बन जाती है. रेस्टोरेंट की बात छोड़िए, आज के मौजूदा समय में हम सभी चम्मच और कांटे से खाने के शौकीन हो गए हैं. यह पद्धति के बढ़ने के पीछे आधुनिकता नहीं बल्कि पश्चिम को अंधाधुंध नकल करना है.

अब हाथ से खाना खाने की ही बात कर लीजिये. हम घर पर भले ही दाल-चावल या इडली-डोसा खाते हों, पर दफ़्तर और रेस्तरां में हम इच्छा-अनिच्छा से ही छुरी-कांटा उठा लेते हैं. जबकि छुरी-कांटे से डोसा खाना मुश्किल है, तब भी हम उसे खाने की कोशिश करते हैं. जिन्हें कांटे से खाने की आदत है, उनके लिए तो ये आसान है और जिन्हें नहीं है, वो ये मानकर चलते हैं कि बाहर छुरी-कांटे से ही खाना खाया जाता है.

इस सबके बीच हाथ से खाने की आदत के फोयदों को तवज्जो देते हुए कुछ विदेशी रेस्तरां हाथ से खाने की आदत को बढ़ावा दे रहे हैं. न्यूयॉर्क, कैंब्रिज, सेन फ्रैंसिसको के कुछ रेस्तरां अपने ग्राहकों को हाथ से खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. यह थोड़ा अजीब है, पर सच है. ये रेस्तरां पहले छुरी-फॉर्क को तरजीह देते थे, पर अब हाथ से खाने की आदत को अपना रहे हैं. लिहाजा कहा जा सकता है कि इन्होंने हाथ से खाने के फायदों को पहचाना है.

इस बदलाव के बाद पश्चिम को पूर्व के नक्शे कदम पर चलते देखा जा सकता है. हम लोगों की सबसे बड़ी कमी है कि हम विदेशी सभ्यता को कूल और अच्छा मानते हैं और अपने कल्चर को कमतर आंकते हैं. उदाहरण के तौर पर हल्दी वाला दूध अब पश्चिम देशों में Turmeric Latte नाम से बेचा जाता है और पसंद भी किया जा रहा है. इसके उलट बात करें तो हम हल्दी वाला दूध छोड़, एलोपैथी पद्धति की तरफ भागते हैं.

हाथ से खाना खाने के फायदे:-

  • हाथ की ऊंगलियों और हथेलियों में पाए जाने वाले कुछ जीवाणु पाचन क्रिया में सहायक होते हैं.

  • Type 2 मधुमेह रोकने में सहायक

  • आप अपने निवाले का आकार खुद तय कर सकते हैं और इस तरह आप ज्यादा नहीं खाएंगे.

  • हाथ से खाना एक तरह का व्यायाम भी है.

  • इसके अलावा सिर्फ भारतीय ही नहीं, अफ्रीकी और मिडल ईस्ट संस्कृतियों में भी लोग हाथ से ही खाना खाने लगे हैं.

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