नई दिल्ली : आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करते हुए सामाजिक न्याय व आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने बुधवार को कहा कि यह विधेयक अमीरी और गरीबी की खाई पाटने में कामयाब होगा। 

उन्होंने विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सरकार जल्दबाजी में इसे लेकर नहीं आई है। अच्छी तरह से सोच-विचार कर यह फैसला किया गया है। इससे देश के करोड़ों नौजवानों के आर्थिक सशक्तीकरण का रास्ता साफ होगा, जिन्हें गरीबी की मार झेलने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता था। उन्होंने विपक्ष से विधेयक पर सर्वसम्मति के लिए अनुरोध किया। विधेयक पेश करते हुए गहलोत को कई विपक्षी दलों  की टोकाटाकी और हंगामे का सामना करना पड़ा। इस कारण उनका भाषण एक बार में पूरा नहीं हो पाया।

सामाजिक न्याय व आधिकारिता मंत्री ने कहा कि देश-दुनिया में आज का दिन याद किया जाएगा। यह विधेयक अमन-चैन और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के लिए तथा समरसता के लिए जाना जाएगा। गहलोत के विधेयक पेश करने के बाद 12 बजकर 35 मिनट पर भाजपा की ओर से प्रभात झा ने चर्चा शुरू की। झा ने कांग्रेस को घेरने का प्रयास करते हुए कहा, जो लोग देश की भावना को नहीं समझते, वेल में आते हैं। अगर कांग्रेस में दम है तो वह कहे कि हम विधेयक का विरोध करते हैं। 

व्यवधान के चलते झा का भाषण अधूरा रहा। दो बजे दोबारा उन्होंने चर्चा शुरू की तो उन्होंने फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर राफेल का मुद्दा उठाने के लिए निशाना साधा। इस पर वित्त मंत्री व सदन के नेता अरुण जेटली खिन्न नजर आए। उन्होंने चर्चा विषय पर केंद्रित रखने का संकेत किया। जेटली विवाद के बजाय सर्वानुमति बनाने पर जोर दे रहे थे। इसके बाद झा सर्वानुमति की बात करने लगे और उन्होंने समर्थन के लिए सभी दलों को धन्यवाद दिया। 

झा ने कहा, यह विधेयक करोड़ों युवाओं की उम्मीदों से जुड़ा है। देश में एक वर्ग था जो हमेशा चर्चा करता था कि हमारे लिए क्या कभी कुछ नहीं होगा। उनके मन में मोदी सरकार के इस फैसले से उल्लास है। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और कहा कि वे वाकई ‘सबका साथ सबका विकास’ में यकीन करते हैं।

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