मो.रिजवान

वाराणसी: बीएचयू सरसुंदर लाल अस्पताल में दूर दराज से मरीज दिखाने आते हैं। यहां व्यवस्था ओपीडी के दिनों में ट्रैफिक की मार झेल रही है। सोमवार से शनिवार तक सुबह आठ बजे से लेकर 12 बजे तक अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों को एम्बुलेंस के लिए रास्ता साफ कराने में जीतोड़ मेहनत करनी पड़ती है। कई बार भीड़ का आलम यह होता है कि चिकित्सकों-प्रोफेसरों तक को अपनी गाड़ी छोड़कर अस्पताल तक पैदल जाना पड़ता है। एक ही कैम्पस में आयुर्वेद, एलोपैथ और आपात चिकित्सालय होने के नाते यह संकट उत्पन्न हुआ है।

अस्पताल परिसर में दो स्टैंड होने के बाबजूद यूपी, बिहार, रांची, झारखण्ड और मध्यप्रदेश से लागतार बढ़ते जा रहे मरीजों से गाड़ियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।दोनों स्टैंड दो पहिया वाहनों के लिए है मगरचार पहिया वाहनों के लिए अस्पताल की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल आने वाले मरीजों के तीमार दारों को अस्पताल में जब गाड़ी पार्क करने का जगह नहीं मिल रहा तो वह अब अस्पताल परिसर से बाहर विश्वविद्यालय केमुख्य द्वार के इर्द-गिर्द गाड़ियों को पार्क कर रहे हैं। चूंकि इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों का प्रवेश परीक्षा जारी है जिससे विश्वविद्यालय में आने-जाने वालों का दबाब बढ़ा है। परीक्षाएं छूटने के बाद गाड़ियों के सड़क किनारे पार्क किए जाने से विश्वविद्यालय का मुख्यद्वार अक्सर जाम की चपेट में आ जाता है, जिसका असर पूरे विश्वविद्यालय परिसर में पड़ता है।

यहां के कुछ रेजिडेंटों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन इस ओर ध्यान अभी नहीं देता तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ेंगे। अभीवक्त रहते ही अस्पताल परिसर से बाहर वाहन स्टैंड देना चाहिए यदि जगह नहीं है तो मल्टी स्टोरी पार्किंग को वैकल्पिक रखा जा सकता है। कई बार देखा गया है कि लोग अस्पताल के स्टैंड में अपनी गाड़ियों कई-कई दिनों तक वैसे ही छोड़े रहते है, यदि उसके लिए समय 5 घंटे का निर्धारित कर दे तो कुछ भार कम होगा। अस्पताल प्रबंधन को वक्त रहते इस ओर ध्यान देना होगा अन्यथा वह समय दूर नहीं जब ओपीडी डिस्टर्ब होने का एक कारण स्टैंड बने।

नो पार्किंग का बोर्ड, खड़ी होती हैं गाड़िया

सर सुंदर लाल अस्पताल में कई जगह नो पार्किंग जोन का बोर्ड लगा है, फिर भी वहां आने वाले लोगों की मन मानी कहें या अस्पताल सुरक्षा गार्डों की लापरवाही, कि नो पार्किंग बोर्ड होने के बाद भी लोग अपने अपने वाहन नो पार्किंग एरिया में खड़े करके चले जाते हैं। जिससे परिसर में घंटों जाम लगाता है।

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