नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की बेक रॉलिंग्स ने बेयर-नकल बॉक्सिंग की फ्लाईवेट कैटेगरी में अपना वर्ल्ड टाइटल बरकरार रखा है। 29 साल की रॉलिंग्स ने बेयर-नकल फाइटिंग चैंपियनशिप में मैक्सिको की सेसेलिया फ्लोरेस को हरा दिया। रॉलिंग्स ने 2011 से प्रोफेशनल फाइटिंग शुरू की थी। लेकिन उन्हें चार साल तक घरेलू हिंसा सहनी पड़ी। बॉक्सर पति डेन हयाट उनके साथ रोज मारपीट करता। 2013 में पति का घर छोड़ने के बाद उन्होंने एक बार फिर खेल की ओर रुख किया और 5 साल बाद बेयर-नकल बॉक्सिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनीं। उन्होंने 15 मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइट में से 7 जीतीं। रॉलिंग्स ने पिछले साल ही बेयर-नकल बॉक्सिंग शुरू की थी।

ऑस्ट्रेलिया की मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट और बेयर-नकल बॉक्सर बेक रॉलिंग्स कहती हैं, ‘मैं इस खेल के लिए बनी हूं और यह खेल मेरे लिए। शायद इसलिए क्योंकि मैंने कई साल तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना सही है। इसलिए खेल से जुड़ाव महसूस करती हूं। मैं बच्चों को भी अपने जैसा मजबूत बनाना चाहती हूं।’

रॉलिंग ने बताया, ‘डेन हयाट के साथ बिताए वे साल मेरे जीवन का सबसे बुरा समय था। लेकिन अब मैं उस समय को याद कर रोती नहीं हूं। कुछ घाव ऐसे होते हैं, जो कभी नहीं भरते। वह मेरे साथ इतनी मारपीट करता कि मैं घंटों बेहोश रहती। वह तकिए से मेरा मुंह दबा देता ताकि मैं सांस भी न ले सकूं। वह मेरा सामान तोड़ देता। एक दिन उसने मुझ पर चाकू से हमला किया। उसने मुझे और मेरे बेटे को मारने की कोशिश की। इसके बाद हमने घर छोड़ दिया। उसके साथ रहते हुए मुझे हर पल मौत का डर होता था। अब उस घटना को 6 साल हो चुके हैं। मैंने खुद को संभाल लिया है। मेरे दो बेटे हैं।’

मेरी हयाट से मुलाकात 2010 में हुई थी। तीन महीने बाद ही हयाट ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। वह भी प्रोफेशनल फाइटर था। जब भी मैंने उसे रोकने की कोशिश की, कभी सफल नहीं हुई। खुद की रक्षा करना मेरे लिए असंभव था। वह मुझे जला देता। मेरे कपड़े तक फाड़ देता। कई बार ऐसा हुआ कि मेरे पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं होते थे। मैंने अक्टूबर 2011 में पहली एमएमए फाइट की थी। लेकिन पहले ही राउंड में नॉकआउट हो गई थी। 2013 में उसने मेरे बच्चों एनसन और जैक को दुख पहुंचाने की कोशिश की तो मैंने अपने बच्चों के लिए हयाट का घर छोड़ दिया। इसके बाद मैंने दोबारा यूएफसी फाइटिंग शुरू कर दी थी। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स ने मुझे खुद से प्यार करना सिखाया। उसने मुझे मजबूत इंसान बनाया।’

अब मैं बिना किसी डर के रहती हूं, क्योंकि मैंने बॉक्सिंग को अपना करिअर बना लिया है। मैंने अपने अनुभव सबके साथ इसलिए साझा किए ताकि मैं उन लोगों की मदद कर सकूं, जो घरेलू हिंसा की शिकार हैं या रही हैं। मैं विक्टिम से कहना चाहती हूं कि उनकी कोई गलती नहीं है। वे कमजोर नहीं हैं। अब मैं खुद को ‘वाइल्ड चाइल्ड’ और ‘राउडी बेक’ मानती हूं। मैं अपनी लाइफ के उन बुरे वर्षों से बाहर निकल चुकी हूं।’

बेयर-नकल बॉक्सिंग के बारे में बताती हैं, ‘इसमें बिना बॉक्सिंग ग्लव्स के बॉक्सिंग होती है। इसमें विरोधी बॉक्सर के अलावा आपको भी चोट लगती है। हमें बहुत ही सावधानी से पंच जमाने होते हैं। हम विरोधी के सिर के पीछे या साइड से पंच नहीं कर सकते। इससे हमारे हाथ में भी चोट लगती है। हमें सामने से ही पंच करना पड़ता है। इसमें पंच से ज्यादा स्पीड और ताकत जरूरी होते हैं। मैंने अपने हाथों को मजबूत करने के लिए कुंग फू की ट्रेनिंग ली। इसके अलावा मैं सैंडबैग पर पंच कर हाथों को मजबूत बनाती हूं। यह मेरी तीसरी ही फाइट थी। मैं खुद को इस खेल की क्वीन महसूस करती हूं। मुझे लगता है कि बेयर-नकल बॉक्सिंग का जो स्किल मेरे पास है, किसी और के पास नहीं हैं। यह खेल मेरे लिए बना है और मैं इस खेल के लिए बनी हूं। हालांकि मैं अपने खेल में लगातार सुधार कर रही हूं।’

रॉलिंग्स रोजाना बच्चों को स्कूल छोड़ती हैं। फिर जिम में दो घंटे ट्रेनिंग करती हैं। वे कहती हैं कि मैं बच्चों को भी अपने जैसा मजबूत बनाना चाहती हूं। ताकि उन्हें जीवन में कभी शारीरिक प्रताड़ना न सहना पड़े। रॉलिंग्स ने बेयर-नकल फाइटिंग चैंपियनशिप से कॉन्ट्रैक्ट किया है। वही उनके ट्रेनिंग और फाइट का खर्च उठाता है।

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