रायपुर, छत्तीसगढ़, दिनांक 13 अप्रैल 2019। भारतीय संविधान ने देश की महिलाओं की दशा और दिशा को बदल दिया। सहीं मायने में महिलाओं को असली आजादी भारत का संविधान बनने के बाद मिली है जिसमें महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिला। भारत के संविधान में महिलाओं को अनेक अधिकार प्रदान किये यही कारण है कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। बौद्ध समाज की महिलाओं ने अपनी एकता का परिचय देकर महिला सशक्तिकरण की मिशाल पेश की है समाज की महिलाओं को न सिर्फ अम्बेडकर जयंती के अवसर पर बल्कि 24 घण्टे और 365 दिन समाज के विकास के लिए जागरूक होकर संगठित होना जरूरी है। उक्त बातें शहीद स्मारक भवन रायपुर छ.ग. में आयोजित बौद्ध महिला सम्मेलन की विशिष्ट अतिथि, सामाजिक कार्यकर्ता व महिला नेत्री सावित्री जगत ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। सावित्री जगत ने कहा भारतीय संविधान के जनक बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती के 2 दिन पूर्व 12 अप्रैल को बौद्ध समाज की महिलाओं ने सैकड़ों की संख्या पर जुटकर सामाजिक एकता का परिचय दिया है जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। इस अवसर  सावित्री जगत ने जाति प्रमाण पत्र संवैधानिक अधिकार को लेकर रहने की बात की है इसके लिए महिलाओं को आगे आकर संघर्ष करने का भी आव्हान किया है जरूरत पड़ने पर सरकार के समक्ष पहले निवेदन, आवेदन फिर आंदोलन करने की बात भी कही इसके पूर्व कार्यक्रम आयोजकगण के द्वारा समाजहित में किये जा रहे कार्यों से प्रभावित होकर एवं जाति प्रमाण पत्र के लिए सड़क की लड़ाई लड़ने वाली  सावित्री जगत का सम्मान भी किया।  सावित्री जगत ने अम्बेडकर जयंती की अग्रिम बधाई देते हुए आयोजकगण को शुभकामनाएं दी। इसके अतिरिक्त  जगत ने कहा 14 अपै्रल अम्बेडकर जयंती के अवसर पर राजधानी के कालीबाड़ी स्थित उत्कल महिलाओं के द्वारा समाज के उत्कृष्ठ 14 बच्चों को छात्रवृत्ति एवं संविधान की किताब व कलम देकर सम्मान किया जायेगा।

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