रायपुर : दुर्ग के रहने वाले ये बाप-बेटे बैंड बजाने का काम करते थे, लेकिन हकीकत में इनका पेशा था लूट का। ऐसा लूटेरा, जो लूट के वक्त गोलियां चलाने से भी गुरेज नहीं करता। दुर्ग में 9 लाख की लूट मामले में पुलिस के हत्थे अपने सहयोगियों के साथ चढ़े इन बाप-बेटों ने रायपुर में लूट से जुड़े राज खोले, तो पुलिस भी सन्न रह गयी। लुटेरों ने इस बात को कबूल किया है कि  उन्होंने रायपुर में भी कई बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि ये शातिर लुटेरे हमेशा हाइवे के पास ही घटना को अंजाम देते थे, ताकि वो आसानी से मौका-ए-वारदात से निकल सकें।  आरोपियों के पास से पुलिस ने एक कट्टा, जिंदा कारतूस, बाइक और नगद राशि जब्त की गई है।

इस मामले का खुलासा करते हुए एडिशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर, पुरानी बस्ती डीएसपी कृष्णा पटेल ने बताया कि आरोपी बडे ही शातिर तरीकें से घटना को अंजाम देते थे। इन आरोपियों ने कट्टे की नोक पर न्यू राजेन्द्र नगर, डीडी नगर और टिकरापारा इलाके में भी लूट की घटना को अंजाम दिया था। आरोपियों के गैंग में 20 से 25 है और हर घटना में ये लोग अलग-अलग गाड़ियों का इस्तेमाल किया करते थे।

इस दौरान पुलिस ने इन आरोपियों की संलिप्तता बोथरा हत्याकांड में भी होने की जतायी है। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इनके पास से जो कट्टा मिला है उसके हिसाब से आरोपी बोथरा हत्या कांड में भी संलिप्त हो सकते है फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और इस बारे में पूछताछ जारी है।

पुलिस कर रही है बाकी आरोपियों की तलाश…..

इस मामले में संलिप्त बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए राजधानी से पुलिस की टीम यूपी में डेरा डाले हुई है। आरोपियों की खोजबीन भी जारी है और जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
आरोपी का नाम देवी प्रसाद बंसोर और मनीष बसोर दुर्ग के रहने वाले हैं, जबकि संजय उर्फ महेश वर्मा यूपी के रहने वाले हैं।

क्या था बोथरा हत्याकांड

सराफा कारोबारी पंकज बोथरा 26 जून 2016 की रात 9:30 बजे अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। उनके घर से थोड़ी दूर ही संजीवनी अस्पताल के पास बाइक सवार दो युवकों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने कारोबारी उनका बैग छिनने की कोशिश की, कारोबारी ने विरोध किया तो गोली मार दी। लुटेरों ने उनकी नाक पर के पास फायर किया और उनका बैग छिनकर भाग निकले। बोथरा की वहीं मौत हो गई। लुटेरे जो बैग लेकर गए थे, उसमें सोने-चांदी के जेवर और पैसे थे। घटना के दो महीने बाद टिकरापारा में शराब दुकान में गोली मारकर लूट हो गई। पुलिस ने झारखंड कुंदन गुप्ता के गिरोह को पकड़ा था। इस गिरोह ने महासमुंद दुकान में भी लूट की थी। आरोपियों से दो और मामले खुले थे। बोथरा कांड में पुलिस को कुंदन का मोबाइल लोकेशन मिला था। उसके नाम से गुमनाम चिट्ठी भी जेल से आई थी। वह बोथरा के दुकान के पास ही किराए पर रहता था। इसके अलावा और भी कुछ क्लू पुलिस को मिले, जिसके आधार पुलिस को उस पर शक है।

 

source by npg

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