वाह रे टोप्पो, तेरा खेल,
तूने निकाला जनसंपर्क का तेल।
अब एसआईटी जांच के बाद,
होगी अच्छे अच्छों को जेल।।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आरटीआई कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा के कार्यकाल में हुए जनसंपर्क विभाग के घोटाले में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से एसआईटी जांच की मांग की है।

संजीव अग्रवाल ने कहा कि जिस प्रकार से मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद जनसंपर्क विभाग के तत्कालीन सीपीआरओ राजेश टोप्पो को आनन फानन में सस्पेंड कर दिया गया उससे यह साफ है कि तत्कालीन भाजपा सरकार अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर मीडिया के कुछ लोगों को विदेश ले जा कर उनका स्टिंग कर उन्हें तत्कालीन सरकार के पक्ष में ख़बरें प्रकाशित करने के लिए ब्लैकमेल करती थी।

संजीव अग्रवाल ने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए मीडिया का बेजा इस्तेमाल किया करती थी। आज भी कई मीडिया हाउसेज की पेमेंटस जनसंपर्क विभाग में लटकी हुई है और दूसरी ओर तत्कालीन भाजपा सरकार ने एक कंपनी कंसोल इंडिया लिमिटेड व अन्य फर्जी एजेंसियों के जरिए लगभग 500 करोड़ का घोटाला कर दिया। यह तो वह राशि है जिसका आकलन किया जा सकता है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि पिछले 15 साल से छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार ने जनसंपर्क के माध्यम से और कितने घोटाले किए हैं।

संजीव अग्रवाल ने कहा कि अब जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आ गई है तो उससे मीडिया को न्याय मिलने की उम्मीद है। इसीलिए अब मुख्यमंत्री को इस विषय को संज्ञान में लेकर त्वरित कार्रवाई करने की जरूरत है। संजीव अग्रवाल ने मांग की है कि न सिर्फ राजेश टोप्पो बल्कि उनके आका अमन सिंह व अन्य अधिकारी और साथ ही इस प्रकरण में लिप्त कुछ पत्रकार और मंत्रियों की भी पूर्ण रूप से जांच होनी चाहिए ताकि जो अधिकारी और पत्रकार निष्पक्ष रुप से काम करते हैं उनकी छवि पर कोई दाग ना लग पाए और कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भ्रष्टाचार उन्मूलन के खिलाफ एक मिसाल प्रस्तुत कर पाएं। क्योंकि अगर देश का चौथा स्तम्भ जोकि मीडिया है वह खुद ही खतरे में पड़ गया है तो लोग सरकार से क्या उम्मीद लगाएंगे?

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