नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सामान्य वर्ग के गरीब लोगों के लिए लाए गए 10 प्रतिशत आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी है. लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद आरक्षण बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी है.

आरक्षण बिल पारित होने के बाद सामान्य वर्ग के गरीबों को नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा. सूत्रों के मुताबिक आने वाले एक हफ्ते में इस बिल का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा.

बता दें, चुनाव से पहले इस बिल को लाने का विपक्ष ने विरोध किया था. इसके बाद लोकसभा में गत 8 जनवरी को विस्तृत चर्चा के बाद मतविभाजन के जरिए इस बिल को पास कराया गया था. सदन में 323 सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया था. 

इसके बाद अगले दिन राज्यसभा में  विस्तृत चर्चा के बाद विधेयक पास हुआ था. इसके पक्ष में 165 वोट पड़े थे. विपक्ष में भी 3 मत पड़े थे. आम आदमी पार्टी ने मत का बहिष्कार किया था. राष्ट्रीय जनता दल ने इस बिल के खिलाफ वोटिंग की थी.

संविधान संशोधन विधेयक के जरिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में एक धारा जोड़कर शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा.

अब तक संविधान में एससी-एसटी के अलावा सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का कोई जिक्र नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में अपने फैसले में आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा तय कर दी थी. सरकारी
सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित संविधान संशोधन से अतिरिक्त कोटा का रास्ता साफ हो जाएगा.

प्रस्तावित कानून का लाभ ब्राह्मण, राजपूत (ठाकुर), जाट, मराठा, भूमिहार, कई व्यापारिक जातियों, कापू और कम्मा सहित कई अन्य अगड़ी जातियों को मिलेगा. सूत्रों ने बताया कि अन्य धर्मों के गरीबों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा.

सालाना आय 8 लाख रुपए से कम और जिनके पास पांच एकड़ से कम कृषि भूमि है, उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है. नगर निकाय क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट या इससे ज्यादा क्षेत्रफल का फ्लैट नहीं होना चाहिए और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में 200 यार्ड से ज्यादा का फ्लैट नहीं होना चाहिए.

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