नई दिल्ली : बसपा सुप्रीमो मायावती के विजयरथ को उत्तर प्रदेश में रोकने के लिए सपा के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने लखनऊ में शनिवार को संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि बसपा और सपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। रायबरेली व अमेठी सीट कांग्रेस नेता सोनिया गांधी व राहुल गांधी के लिए छोड़ी गई हैं। दो सीटें अन्य सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई हैं। यह सहयोगी दल कौन हैं? इस पर उन्होंने तस्वीर साफ नहीं की है। उन्होंने शिवपाल को जरूर भाजपा की बी टीम बताया और तंज करते हुए कहा कि भाजपा द्वारा उन पर खर्च किया जा रहा पैसा बर्बाद जाएगा।

मायावती साफ किया कि यह गठबंधन लोकसभा चुनाव में तो रहेगा ही साथ में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी रहेगा। उन्होंने कहा कि 2019 में इस गठबंधन से नए राजनीतिक क्रांति का संदेश निकलेगा। सपा-बसपा गठबंधन चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि जनहित के लिए किया गया है। यह गठबंधन आगे चलकर देश के बेहतर कल बनाने वाला साबित होगा। यह गठजोड़ नरेंद्र मोदी व अमित शाह अर्थात गुरु व चेले की नींद उड़ाने वाला है। 

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सपा के साथ 1993 में विधानसभा चुनावों में कांशीराम व मुलायाम सिंह ने गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया था और सरकार बनाई गई थी। हालांकि, यह गठबंधन कुछ गंभीर कारणों की वजह से ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सका। मायावती ने कहा कि उन्होंने जनहित में ही 2 जून 1995 को हुए लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस को भुलाकर हुए सपा के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है।

मायावती ने सपा-गठबंधन में कांग्रेस को साथ न लेने की वजह बताते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने का अनुभव सपा व बसपा के लिए बेहतर नहीं रहे हैं। इसके चलते ही कांग्रेस को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बसपा ने यूपी में कांग्रेस के साथ 1996 में गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें हमारा वोट तो कांग्रेस को ट्रांसफर हुआ, लेकिन उनका वोट हमें नहीं मिला। इसी तरह से 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन उसका भी फायदा सपा को नहीं मिल सका।

मायावती ने कहा कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत कांग्रेस का वोट भाजपा में ट्रांसफर हो जाता है। इसी के चलते कांग्रेस को गठबंधन में शामिल नहीं किया है। सपा-बसपा के  कार्यकर्ताओं ने उपचुनाव में एक दूसरे को पूरी ईमानदारी से वोट किया और उन्हें कोई परहेज नहीं है। आजादी के बाद लंबे समय तक देश और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में कांग्रेस ने राज किया है। कांग्रेस के राज में कमजोर वर्ग, किसान, व्यापारी, दलित और ओबीसी के लोग परेशान रहे हैं। इनके शासनकाल में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ा है। इसी के चलते बसपा और सपा जैसी राजनीतिक पार्टियों का गठन हुआ ताकि कांग्रेस के मनमानी तरीके से किए जा रहे शासन को मुक्ति मिल सके।

उन्होंने कहा कि भाजपा का नजरिया और शासन का तरीका कांग्रेस के जैसा ही रहा है। रक्षा सौदे की खरीदारी में कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारों ने जबरदस्त घोटाले हुए हैं। कांग्रेस राज में बोफोर्स घोटाला हुआ, जिसके चलते उनकी सरकार चली गई थी। इसी तरह भाजपा को राफेल मामले में सरकार गवांनी पड़ेगी। दोनों पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने घोषित रूप से आपातकाल लगा रखा था और भाजपा ने अघोषित रूप से लगा रखा है। सपा-बसपा के गठबंधन करके चुनाव लड़ने पर 1977 जैसा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि यह गठबंधन भाजपा की जहरीली, सांप्रदायिक और जातिवादी राजनीतिक से प्रदेश को दूर रखने की मंशा से किया गया है। भाजपा ने सिर्फ नफरत को बढ़ावा दिया है। भाजपा समाज में नफरत का जहर भर रही है। राज्य में भूखमरी और गरीबी चरम पर पहुंच गई है। 

मायावती ने अखिलेश के चाचा शिवपाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा द्वारा उन पर बहाया जा रहा पैसा बेकार जाएगा। उन्होंने कहा कि 4 जनवरी को ही गठबंधन फाइनल हो गया था। इसकी भनक शायद भाजपा को हो गई थी जिसकी वजह से हमारे सहयोगी अखिलेश यादव की छवि धूमिल करने के लिए जबरन उनका नाम खनन घोटाले में शामिल किया गया। बसपा इसकी निंदा करती है। हम सपा के साथ इस मामले में पूरी तरह से खड़े हुए हैं। भाजपा के इस कदम के बाद गठबंधन और मजबूत होगा।

source by LH

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