रायपुर: कड़ाके की ठंड के बीच सर्दी के साथ-साथ बीमारियों ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है. बर्ड फ्लू के बाद अब स्वाइन फ्लू का खतरा मंडरा रहा है. ठंड में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इसका वायरस गर्मियों की अपेक्षा ठंड में ज्यादा सक्रिय होता है.

खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द और उल्टी स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं. फ्लू से डरने के बजाय जरूरत इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने की है. डॉक्टर और माइक्रोबायोलॉजिस्ट का कहना है कि “स्वाइन फ्लू” में खांसी या गले में खरास के साथ तेज बुखार हो सकता है. निदान की पुष्टि आरआरटी या पीसीआर तकनीक से किए गए लैब टैस्ट से होती है.स्वाइन फ्लू को लेकर कई नई बातें भी सामने आई है, जिनपर रिसर्च की जा रही है.
बताया जा रहा है कि करेंसी नोट के जरिए भी स्वाइन फ्लू का वायरस फैल सकता है. वहीं बाहर काम करने वाले लोगों की तुलना में ज्यादातर समय घर पर रहने वाले लोगों को स्वाइन फ्लू होने का खतरा ज्यादा रहता है. एक रिसर्च के दौरान पता चला है कि स्वाइन फ्लू का वायरस महिलाओं में ज्यादा सक्रिय होता है.

स्वाइन फ्लू के लक्ष्ण
“हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू बुखार, खांसी, गले में खरास, नाक बहने, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ होता है. शुरुआत में तो सांस लेने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन इसके बढ़ने पर छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम रक्तचाप, भ्रम, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है.”

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बचाव और रोकथाम के तरीके
खांसी और छींक आने पर अपने मुंह में हाथ की बजाए कोहनी रखे, अपने हाथों को समय-समय पर हैंड सैनीटाइजर से साफ करें. अपने आस-पाल ज्यादा सा ज्यादा सफाई रखने की कोशिश करें, फ्लू से चेहरे पर मास्क लगाना बचाव का एक तरीका माना जा रहा है.

 

source by eenadu

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