नई दिल्ली.  देशभर के किसान हर साल अक्टूबर में पराली जलाते हैं। पराली धान की फसल कटने के बाद बचा बाकी हिस्सा होता है, जिसकी जड़ें जमीन में होती हैं। पराली जलाने से नाइट्रोजन ऑक्साइड, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस हवा में फैलती है। ये दमा, ब्रोंकाइटिस के अलावा नर्वस सिस्टम से जुड़ी कई बीमारियों का कारण बनती हैं।हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण हर साल सुर्खियों में आता है। इससे राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली की आबो-हवा भी खराब होती है। नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 80 लाख टन पराली जलाई जाती है।

Untitled-3 copy
1
Untitled-1 copy
Untitled-1 copy

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here